प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, अड्डी बांग्ला, झुमरी तिलैया में धूमधाम से मनाया गया होली उत्सव
प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, अड्डी बांग्ला, झुमरी तिलैया में धूमधाम से मनाया गया होली उत्सव
झुमरी तिलैया में धूमधाम से मनाया गया होली उत्सव

Koderma 

झुमरी तिलैया,अड्डी बांग्ला स्थित प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में रंगोत्सव के पावन अवसर पर होली का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में डॉक्टर संजीता कुमारी, सुनील वर्णवाल तथा समाजसेवी संजय अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे।

केंद्र संचालिका ब्रह्मा कुमारी लक्ष्मी बहन ने होली के पवित्र पर्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में त्योहारों का विशेष महत्व है। जनसाधारण की दृष्टि से होली बैर-भाव भुलाकर आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ाने का पर्व है। यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के मंगल का उत्सव है।

उन्होंने कहा कि जैसे इस ऋतु में प्रकृति के पेड़-पौधे नव रंगों से सुसज्जित हो जाते हैं, वैसे ही हमें भी सत-चित-आनंद स्वरूप शिव के ज्ञान और गुणों से अपने तन-मन को अलंकृत करना चाहिए। सच्ची होली वही है, जिसमें हम मन के विकारों को त्यागकर सद्गुणों की रंगत में रंग जाएँ।

उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी के प्रति मन में कोई गिला-शिकवा हो तो उसे भूलकर ज्ञान और गुणों की होली खेलना ही वास्तविक होली है। “होली” का अर्थ है— मैं परमपिता परमात्मा की हो गई। जब हम बीती बातों को छोड़कर परमात्मा को अपना सर्वस्व मान लेते हैं, तब जीवन के सभी मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं।

लक्ष्मी बहन ने होलिका दहन के आध्यात्मिक महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि जैसे होलिका में असत्य और अहंकार का दहन हुआ, वैसे ही हमें भी अपनी नकारात्मकता, क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष का समूल नाश करना चाहिए। तभी होली का पर्व सार्थक होगा।

कार्यक्रम के अंत में ब्रह्मा कुमारी लक्ष्मी बहन ने सभी उपस्थित जनों को केसर एवं सुगंधित तिलक लगाकर पुष्पों के साथ स्नेहभरी होली खिलाई तथा सभी को जीवन को सुगंधित और सुखमय बनाने का श्रेष्ठ संकल्प लेने की प्रतिज्ञा दिलाई।

इस अवसर पर स्वाति अग्रवाल, कुसुम दुग्गल, संगीता, सरिता, ममता, वीणा, सुमन कुमार, प्रदीप भाई, राजेंद्र भाई, सुनील भाई, नितेश भाई सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

होली का यह उत्सव केवल रंगों का नहीं, बल्कि सद्भावना, ज्ञान और आत्मिक उन्नति का संदेश देकर सम्पन्न हुआ।

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